Thursday, March 15, 2007

अनुराग मुस्कान: देख तेरे साहित्य की हालत क्या हो गई...(व्यंग्य)


सींगवाला गधा, धोबी की कुतिया और साहित्य
-अनुराग मुस्कान
रोमी गधा सूख-सूख कर कांटा हो चुका था। उसे न दिन को चैन था न रात को आराम। दरअसल रोमी गधे को लगता था कि उसका मालिक भीखू अपनी पालतू कुतिया लिली से मुहब्बत करता है। शक़ की कोई दवा नहीं है, नतीजतन लिली कुतिया का दीवाना रोमी गधा शराब की लत का शिकार हो जाता है। एक दिन लिली को खो देने के डर के हाथों मजबूर होकर रोमी अपने मालिक भीखू की हत्या का साज़िश रचता है। प्लॉन के मुताबिक दूसरे दिन सुबह घाट पर जाते समय रोमी, भीखू पर हमला कर देता है। इससे पहले कि भीखू कुछ समझ पाए रोमी गधे के बारह इंच लंबे सींग उसके पेट में होते हैं। अगले ही पल भीखू सड़क पर ढ़ेर हो चुका होता है। आख़िर रोमी अपने और लिली के बीच की दीवार गिरा ही देता है।
दरअसल उपरोक्त गंद्याश मेरी ताज़ा साहित्यिक कहानी का है। इस कहानी का नायक है एक गधा- रोमी गधा, कहानी की नायिका है- लिली कुतिया और इन दोनों का भोला-भाला मालिक भीखू धोबी एक ऐसी भूमिका में जो कहानी की मांग के हिसाब से गतलफ़हमी का शिकार बन जाता है। कहानी अभी पूरी भी नहीं हुई है और मेरे तमाम साहित्यिक मित्र इसके घनघोर आलोचक बन बैठे हैं। कहते हैं कि यह कहानी नहीं बल्कि मेरे पागलपन की निशानी है। मेरे आलोचकों की आंखों में इस कहानी को लेकर जो प्रमुख बिन्दु खटक रहे हैं वह इस प्रकार हैं- आपत्ति नंबर एक- गधे के सिर पर सींग?, आपत्ति नंबर दो- धोबी की कुतिया? आपत्ति नंबर तीन- कहानी को साहित्य का नाम देना।
यहां मैं अपने आलोचकों की सभी आपत्तियां दूर करना चाहता हूं। दरअसल गधे के सिर पर सींग ही तो मेरी कहानी का सबसे सशक्त प्रयोगात्मक पहलू है। गधे के सिर पर सींग अब कोई असामान्य कल्पना नहीं रही। मुझे लगता है कि सींग वाला गधा हैरी पॉटर कल्चर में स्वागत योग्य होगा। हैरी पॉटर की ही तरह लोग रोमी गधे को भी सिर आंखों पर बिठा लेंगे। सींग वाला गधा कलयुगी कहानी का नया सुपरस्टार होगा। मैंने लोगों की नब्ज़ पकड़ ली है। यह ज़माना तिलिस्म का जमाना है। लोग यथार्थ से दूर और जादू-टोने के करीब हैं। यहां लोग सिर उठा कर कोल्डड्रिंक पीते हैं। दूध, लस्सी, छाछ आदि भी सिर उठा कर पीने वाले लोग अब 'बोतलों' में उतर आये हैं। हाई क्लॉस सोसायटी में सिर्फ कोल्डड्रिंक ही सिर उठा कर पी जाती है, महंगा हो रहा दूध पीने की असमर्थता ने तो सिर झुका दिया है। हिप-हॉप सोसायटी में हैरी पॉटर, कोल्डड्रिंक और पिज़्ज़ा के तिलिस्म की रफ़्तार के साथ सींग वाला रोमी गधा भी सरपट दौड़ेगा। रोमी, रोमांच का नया नाम होगा। मुझे विशवास है, जिस समाज ने ही-मैन, सुपर-मैन, स्पॉइडर-मैन और हैरी पॉटर को सम्मानजनक स्थान प्रदान किया है वह मेरे रोमी को भी खारिज नहीं करेगा। पहले कहानी फिर उपन्यास और फिर फिल्म। धीरे-धीरे मैं रोमी को हैरी पॉटर का भारतीय संस्करण बना दूंगा।
कहानी के दमदार चरित्र भीखू धोबी की पालतू कुतिया लिली कहानी को नये प्रतिमान देगी। दरअसल लिली कुतिया मादा प्राथमिकता प्रावधान की मानसिकता का लाभ पा गई है। लेकिन कहानी में उसकी किरदार को लेकर मेरा मौलिक तर्क भी है। जानता हूं कि धोबी का कुत्ता होता है किन्तु धोबी के कुत्ते के पात्र में मुझे कोई स्कोप नज़र नहीं आया। धोबी का कुत्ता न घर का होता है न ही घाट का। इसलिये कुत्ते वाली भूमिका मैंने कुतिया को दे दी। मैं यहां अपनी कहानी में लिली की भूमिका की प्रशंसा करना चाहूंगा। पूरी कहानी में वह रोमी को इस बात का अहसास तक नहीं होने देती कि वह उससे नहीं बल्कि घाट के आवारा कुत्ते मोती से प्यार करती है। मेरी लिली घर की भी है और घाट की भी। घर पर रोमी की और घाट पर मोती की। कहानी में ट्विस्ट की आपको भी तारीफ़ करनी होगी की रोमी चूंकि पहले से ही गधा था इसलिये लिली, बेवफाई के अपराधबोध से स्वत: ही मुक्त होकर अपने मालिक भीखू की हत्या हो जाने के बाद मोती के साथ घाट पर गृहस्थिन हो लेती है।
कुल मिलाकर मेरी कहानी में एक्शन, थ्रिल, सस्पेन्स, रोमांस, इमोशन सब कुछ मौजूद है फिर भी उसकी आलोचना की जा रही है। वरना साहित्य के नाम पर क्या कुछ नहीं लिखा और बेचा जा रहा आजकल। ज़माना बदल गया है यारों। हम उस देश के वासी है जिस देश में गंगा का प्रवाह भी हल्का पड़ चुका है। यहां कुछ लोग भले ही बड़ी शान से सूमो चलाते हो लेकिन कुछ गरीबों को साईकिल रिक्शा भी किराये पर लेने के लिये एक आदमी की गारंटी नसीब नहीं होती। हम गंगा नहीं बचा पाये, हम विशवास नहीं बचा पाये, हम आत्म-सम्मान नहीं बचा पाये, हम चरित्र नहीं बचा पाये तो साहित्य कब तक बचा पायेंगे? बचा लें तो बड़ी बात है।

2 comments:

सुजाता said...

अनुराग भाई इतने निराशावादी न बनो. एक पत्थर तो तबीयत से उछालो...!

ePandit said...

बहुत खूब आपकी कहानी जरुर हिट होगी। मेरी शुभकामनाएं!